कालेज तराना

ताबीर सभी के ख्वाबों की, और हर दिल की ये धड़कन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

इस गुलशन में जो आता है, आते ही महकने लगता है
जब साथ अमल का होता है, कुछ और चमकने लगता है
हर कौम समा जाए इसमें, बाबरकत इसका दामन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

हर सोच की है ताबीर यहाँ, हर फिक्र मनुव्वर होती है
तहज़ीबो तमदुन की भी यहाँ, तालीम बराबर होती है
ज़र्रा उठ कर खुर्शीद बने, ऐसा नूरानी आँगन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

एखलाको मुरव्वत का मर्कज, यां इल्म का दरिया बहता है
जो इसके करीब आये उस पर, रहमत का साया रहता है
यकजहती के अन्दाज़ में जो, हर पल बरसे वह सावन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

हर सुबह उमंगो का सूरज, इसके दामन में आता है
तालीम की किरनों से खुद ही, कुछ और रौशन हो जाता है
ये फिक्रो हुनर का महवर है, ये शम्सो कमर का मसकन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

ताबीर सभी के ख़्वाबों की, और हर दिल की ये धड़कन है
ये गुलशन कोई आम नहीं, ये इल्मो अमल का गुलशन है

                                             -डॉ. कलीम ‘कैसर’

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